जब कभी आकुल मन की राधा बनती, तो, तुम ही... युगश्रेष्ठ... विजयश्री को पाती जब कभी आकुल मन की राधा बनती, तो, तुम ही... युगश्रेष्ठ... विजयश्री को पाती
जितनी कोमल है उतनी ही घातक उसकी वाणी है। जितनी कोमल है उतनी ही घातक उसकी वाणी है।
तू आज की नारी तू कर्म योगिनी तू खुद ही राह बनाती तू आज की नारी तू कर्म योगिनी तू खुद ही राह बनाती
शत-शत नमन करते बहुत बड़ा आभार हो तुम। शत-शत नमन करते बहुत बड़ा आभार हो तुम।
मेरे दिल की धड़कन माँ मेरे दिल में महफूज़ हैं आप माँ. मेरे दिल की धड़कन माँ मेरे दिल में महफूज़ हैं आप माँ.
नारी बिन जीवन नही, जाने यह संसार। यही सृष्टि का रूप है, यही जगत आधार।१। नारी बिन जीवन नही, जाने यह संसार। यही सृष्टि का रूप है, यही जगत आधार।१।